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Thursday, 16 May 2024

साधु रामचाँद मुरमू | Biography of Sadhu Ramchand Murmu






साधु रामचाँद मुरमू ---

साधु रामचाॅंद मुर्मू का जन्म पछिम बंगला राज्य के मिदनापुर जिला अन्वर्गत कामारबादी गाँव में सन् 30 अप्रैल 1897 ई० को हुआ था तथा मृत्यु 16 दिसम्बर 1954 ई० को हुआ। उनके पिताजी का नाम मोहन मुर्मू तथा माताजी का नाम कुनी मुर्मू था। उनके दो लड़के हैं कालीपद मुर्मू एवं धनंजय मुर्मू। साधु रामचाॅंद मुर्मू का शिक्षा बिमपुर और भीमपुर स्कूल में हुआ था। मुर्मू जी समाज सेवी एवं समाज सुधारक व्यक्ति थे। इसलिए इन्हें साधु उपाधि से सम्मानित किये गये थे। संताली भाषा के लिए 'मौज दांदेर ऑक' लिपि का निर्माण भी किये थे। सन् 1940 ई० में "लिटा गोडेत". पुस्तक प्रकाशित किये हैं। उसके बाद साधु रामचाॅंद उईहार बाथान संस्था से, सन् 1969 ई० में 'जोमसिम बिनती संसार फेंद आदि पुस्तकें प्रकाशित किये हैं। मुर्मू जी का विचार था- "अच्छे आदर्श बनकर ही बच्चों के भविष्य को दिशा दिया जा सकता है।

" इसलिए अपनी नाटक "संसार फेंद" में लिखे हैं-"आबोन चेतान रेगे नोवा दिसोम होड़ाः संसार रेनाः सारभार लादे मेनाःआ।"

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